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पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सभी को होगा फायदा

पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सभी को होगा फायदा

Jun 26, 2014

पीलीभीत : आरक्षित वन प्रभाग के डीएफओ राजीव मिश्रा का कहना है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद इसका फायदा पूरे जिले के लोगों को मिलेगा। इससे किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है। टाइगर रिजर्व बन जाने से यहां ईको टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश के पर्यटक आएंगे तो यहां रोजगार के तमाम नए साधन उपलब्ध होने लगेंगे। इसके साथ ही टाइगर समेत दूसरे वन्य जीवों का समुचित तरीके से संरक्षण मिल सकेगा। अलबत्ता बगैर अनुमति के जंगल में लोगों की आवाजाही बिल्कुल नहीं हो सकेगी। यदि जंगल के किनारे खेतों में कोई वन्य जीव फसलों को नुकसान पहुंचाएगा तो किसान को उचित मुआवजा मिलेगा। इसी प्रकार टाइगर का किसी पर हमला हो जाए तो पीड़ित को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बुधवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित प्रश्न पहर के दौरान डीएफओ ने टेलीफोन के माध्यम से पाठकों से रूबरू होकर उनके सवालों के जवाब देकर संतुष्ट किया।

सवाल : जंगल के निकटवर्ती इलाकों में स्थित खेतों में अक्सर जंगली जानवर घुस जाते हैं। इससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। टाइगर रिजर्व बन जाने के बाद अब किसानों को कैसे राहत मिलेगी। – जगदीश सिंह सिद्धू, तुलसीपुर

जवाब : यह सिद्ध हो जाने पर कि फसलों को नुकसान जंगली जानवर ने पहुंचाया है तो त्वरित निस्तारण करते हुए पीड़ित किसान को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

सवाल : नेपाल से सटी सीमा पर लकड़ी की तस्करी हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। – मो. अयाज खां, शेरपुर कलां

जवाब : शारदा पार क्षेत्र का जंगल खीरी जिले की संपूर्णानगर रेंज के अधीन आता है। बराही एवं हरीपुर रेंज इसी जिले में है। नेपाल सीमा के निकट लकड़ी तस्करी के बारे में जांच कराई जाएगी। इसे रोकने के लिए संपूर्णानगर रेंज को लिखा जाएगा।

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सवाल : किसानों को अपने लगाए पेड़ कटवाने के लिए वन विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे किस प्रकार सहूलियत मिल सकती है। – शत्रुघन पांडेय, चांदूपुर

जवाब : यूकेलिप्टिस व पापुलर के अपने पेड़ कटवाने के लिए अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होती। अलबत्ता अन्य प्रजातियों के अपने पेड़ कटवाने के लिए खसरा, खतौनी की नकल के साथ सामाजिक वानिकी विभाग से परमिट बनवाना पड़ेगा। इसकी एक प्रक्रिया है, इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है।

सवाल : शहर में नगर पालिका क्षेत्र में चोरी से पेड़ काटने की घटनाएं होती रहती हैं लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। – फहीम खां, मुहल्ला मोहम्मद वासिल

जवाब : काटे जाने वाले पेड़ अगर नगर पालिका के हैं तो वही संस्था इसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। वरना सामाजिक वानिकी प्रभाग इसकी रोकथाम करता है। यदि कहीं पेड़ काटने की बात पता चलती है तो तुरंत इसकी सूचना सामाजिक वानिकी को दें।

सवाल : पूरनपुर क्षेत्र में वृक्षों का अवैध रूप से कटान हो रहा है लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। – नाजिर रजा बरकारी, पूरनपुर

जवाब : पूरनपुर का पूरा क्षेत्र पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अंतर्गत नहीं आता। वहां सामाजिक वानिकी प्रभाग का भी जंगल है। शारदा पार का क्षेत्र खीरी जिले की संपूर्णानगर रेंज से जुड़ा है। अवैध कटान किस क्षेत्र में हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी मिले तो निश्चित रूप से प्रभावी कार्रवाई होगी।

सवाल : पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जंगलों के आसपास स्थित गांवों के लोगों को क्या फायदा मिलेगा। – निर्भय सिंह, माधोटांडा

जवाब : टाइगर रिजर्व बन जाने से अब जंगली जानवर यदि किसानों की फसलें उजाड़ देते हैं तो पीड़ित किसानों को मुआवजा की कार्रवाई तत्काल होगी। साथ ही पयर्टन को बढ़ावा मिलने से किसानों को खेती से साथ ही रोजगार के दूसरे साधन भी मिलने लगेंगे।

सवाल : जंगल में अक्सर शिकारी घुस जाते हैं लेकिन वन कर्मियों को पता नहीं लग पाता। टाइगर रिजर्व बन जाने से इसमें क्या बदलाव आएगा। – रामपाल, बरखेड़ा

जवाब : जंगल के सभी इलाकों में गश्त को प्रभावी बनाया गया है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन विभाग को और भी संसाधन उपलब्ध हो जाएंगे। वैसे भी जंगल में अवांछित लोगों की धरपकड़ का अभियान चल रहा है। बगैर इजाजत के किसी को भी जंगल में नहीं घुसने दिया जाएगा।

सवाल : पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद अब यदि कोई जंगल में घूमना चाहे तो इसके लिए क्या करना पड़ेगा।  – राजेंद्र कुमार, ललौरीखेड़ा

जवाब : जंगल में भ्रमण करने वालों के लिए रास्ते तय कर दिए गए हैं। पर्यटक जिस क्षेत्र में घूमने जाना चाहेंगे तो उसके लिए पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी। जिस रास्ते से जाएंगे, उसी से वापस लौटना होगा।

सवाल : जंगल से तमाम लोग जलौनी लकड़ी की निकासी करके व्यापार कर रहे हैं। रोजाना भारी मात्रा में साइकिलों से लकड़ी ढोयी जाती है। – विशन कुमार, पूरनपुर

जवाब : जंगल में बगैर अनुमति प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है। साइकिलों के जलौनी लकड़ी लाने वालों के खिलाफ अभियान चल रहा है। रोजाना ऐसे लोग पकड़े जा रहे हैं।

सवाल : जंगल में अगर कोई अवैध रूप से पेट काटता है तो उससे कितना जुर्माना वसूल किया जाएगा। – संजीव कुमार, नई बस्ती

जवाब : टाइगर रिजर्व हो जाने के बाद जंगल में शिकार अथवा पेड़ काटने वाले को सीधे जेल भेजा जाएगा। इसमें जुर्माना का कोई प्रावधान नहीं है।

 

As posted in Jagran.com

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