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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल में शिकारियों की दस्तक, हुआ चीतल का शिकार

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल में शिकारियों की दस्तक, हुआ चीतल का शिकार

May 6, 2015

शेरपुरकलां (पूरनपुर): टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज में शिकारियों ने चीतल का शिकार कर अपनी आमद दर्ज करा दी है। हालांकि शिकारी अपने मकसद में सफल नहीं हो सके। वनकर्मियों ने सूचना पर जंगल किनारे खेत से चीतल का शव बरामद कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। 1टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज की खिरकिया बरगदिया कंपार्टमेंट के पास मंगलवार की दोपहर कुछ लोगों ने खेत में एक चीतल का शव पड़ा देखा। चीतल की मौत गोली लगने से प्रतीत हो रही थी। इसकी चर्चा जब वनकर्मियों के कान में पहुंची तो हरीपुर से वन दारोगा महफूज सहित कई लोग मौके पर पहुंच गए। वनकर्मियों ने आननफानन में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक चीतल नर बताया जा रहा है जिसके गोली लगी हुई थी। हालांकि वनकर्मियों का कहना है चीतल की मौत कैसे हुई यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा। लेकिन चीतल की मौत ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि रेंज में शिकारियों की आमद हो चुकी है। वनकर्मियों ने इसी आशंका में चंदिया हजारा के कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। हरीपुर रेंजर से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

-File Photo

 

वाहनों की रफ्तार पर लगेगा अंकुश 

पीलीभीत : पीलीभीत से लेकर शाही तक काले हिरन बहुतायत में पाए जाते हैं। यह इलाका सामाजिक वानिकी प्रभाग क्षेत्र में आता है। वर्तमान समय में काले हिरन के संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। इसी वजह से हिरन समेत कई वन्यजीव असुरक्षित घूमते रहते है। कई दिन पहले शाही में हाईवे पर किसी वाहन की टक्कर से काला हिरन घायल हो गया था, जिसे आईवीआरआई बरेली में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान हिरन की मौत हो गई। काले हिरन की मौत के बाद सामाजिक वानिकी प्रभाग ने बरेली हाईवे पर गुजरने वाले वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लगवाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। अगर हाईवे पर शाही तक वाहनों की स्पीड कम रहेगी, तो वन्यजीवों को संरक्षण मिल सकेगा। प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार ने बताया कि पीलीभीत से शाही तक रोड की दोनों साइडों में स्पीड नियंत्रित वाले बोर्ड लगवाए जाएंगे।

कैमरे से रखी जा सकती है निगरानी

पीलीभीत : लुप्तप्राय बाघ को बचाना है, तो जंगल में आने जाने वाले व्यक्तियों पर सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निगरानी रखी जा सकती है। इसके लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व को सार्थक पहल करनी चाहिए, तभी सकारात्मक परिणाम सामने आ सकेंगे। 71288 हेक्टेयर एरिया का क्षेत्रफल माला, महोफ, बराही, हरीपुर व दियोरिया कलां में फैला हुआ है, जो पूरी तरह से खुली हुई है। जंगल की सीमा खुली होने की वजह से वन और वन्यजीवों की सुरक्षा करने में दिक्कत आ रही है।

टाइगर रिजर्व के इंट्री प्वाइंटों पर हो व्यवस्था

कई किलोमीटर में फैले जंगल की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण

लकड़ी चोरी में वन कर्मचारियों का भी रोल अहम रहता हैं। मगर सबूत न होने की वजह से आसानी से छूट जाते हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन को अपने सभी इंट्री प्वाइंटों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, तभी जंगल जाने आने वाले लोगों को निगरानी आसानी से रखी जा सकती है। अगर कहीं पर वन्यजीव दुर्घटना हो जाती है, तो आरोपियों को आसानी से पहचाना जा सकता है। वर्तमान समय में एकाध स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसी दिशा में टाइगर रिजर्व को कदम उठाने चाहिए।

अफसरों से मांगा गया स्पष्टीकरण

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बराही रेंज में बाघ हत्या मामले में रेंजर को निलंबित करने के साथ ही दोनों वन अफसरों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। ये दोनों अफसर अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

 

 

As posted in Jagran.com

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