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बाघ और बाघिन को लेकर संशय बरकरार

बाघ और बाघिन को लेकर संशय बरकरार

Jan 17, 2014

कार्बेट पार्क में महिला को मौत के घाट उतारने वाले जानवर के बाघ या बाघिन होने पर संशय बरकरार है। नरभक्षी बाघिन के कार्बेट पार्क में पहुंचने की खबर से अफजलगढ़ क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों ने राहत महसूस की थी लेकिन पुलिस ने गांवों में मुनादी कराकर बाघिन से सावधान रहने की चेतावनी दी है। यूपी के मुरादाबाद एवं बिजनौर जनपदों में आतंक का पर्याय बन चुकी आमदखोर बाघिन का आतंक क्षेत्र में बरकरार है। कार्बेट पार्क की कालागढ़ वन रेंज में हेड़िया बस्ती की एक महिला की मौत के बाद यूपी के गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली थी लेकिन अफजलगढ़ पुलिस ने गुरुवार को बाघिन से सावधान रहने के लिए मुनादी करा दी। कार्बेट के अधिकारियों ने भी बाघिन के पार्क में आने की से इनकार किया है। इसे लेकर लोगों में अफजलगढ़ क्षेत्र के लोगों में भय व्याप्त है। कार्बेट पार्क के वनाधिकारियों का कहना है कि हेड़िया बस्ती की महिला हरनंदी देवी को बाघ ने मारा है। वह घने जंगलों में है। इससे कालागढ़ वासियों को कोई खतरा नहीं है।

जलौनी लकड़ी लेने गई थी हरनंदी!

कार्बेट पार्क के उपप्रभागीय वनाधिकारी केएस रावत ने दावा किया कि हरनंदी जंगल में फायर लाइन काटने नहीं, बल्कि जलौनी लकड़ियां काटने गई थी। उनके इस बयान पर प्रतीम सिंह रौतेला, महेन्द्र सिंह यादव, कैलाश चंद्र थपरियाल आदि ने आपत्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि हरनंदी जंगल में फायर लाइन काटने ही गई थी।

बाघ के पदचिन्हों का लिया प्रिंट

कार्बेट पार्क के उपप्रभागीय वनाधिकारी केएस रावत एवं वन क्षेत्राधिकारी भारत सिंह सजवाण के दिशा निर्देशन में जंगल में गई वन रक्षकों की टीम ने जंगल में बाघों के पदचिन्ह देखे। उन्होंने बाघ के पग मार्क लिए।

 आयताकार होता है बाघिन का पंजा

वनाधिकारियों के मुताबिक बाघ के पंजे का आकार वर्गाकार होता है जबकि बाघिन का पंजा आयताकार होता है। उन्होंने पार्क में मिले पगमार्क को बाघ का बताया।

As posted in jagran.com

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