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पीलीभीत के वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए नहीं मिला बजट

पीलीभीत के वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए नहीं मिला बजट

Jul 29, 2014

पीलीभीत : टाइगर रिजर्व एरिया में वन्य जीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए वार्षिक कार्य योजना तो मंजूर हो गई, लेकिन बजट के नाम पर विभाग को अब तक कुछ हासिल नहीं हो सका। ऐसे में पीलीभीत टाइगर रिजर्व एरिया में वन विभाग अपने सीमित साधनों से जंगल में मानसून पैट्रोलिंग करा रहा है। शासन ने इसी साल की शुरुआत में यहां के जंगलों को वन्य जीव विहार घोषित कर दिया था। इसी के साथ पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रस्ताव का भी अनुमोदन करने में सरकार ने देर नहीं लगाई। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाने की वजह से पीलीभीत टाइगर रिजर्व की अधिसूचना मतगणना के बाद जारी हो सकी। इससे पहले राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की (एनटीसीए) टीम ने भी यहां पहुंचकर जंगलों एवं बाघों समेत दूसरे वन्य जीवों के बारे में जानकारी हासिल की। इससे लगा कि अब जंगल में बाघों तथा अन्य वन्य जीवों का समुचित ढंग से संरक्षण हो सकेगा।

एनटीसीए के निर्देश पर वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग ने वार्षिक कार्ययोजना तैयार की। शासन के माध्यम से कार्ययोजना को एनटीसीए को भेजा गया। वहां कार्य योजना को मंजूरी दे दी गई। करीब साढ़े सात लाख रुपये की डिमांड रखी गई, लेकिन अभी तक विभाग को कुछ नहीं मिला है। वन विभाग के पास सीमित संसाधन हैं, जिनके सहारे ही जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा का प्रयास किया जा रहा है। जिले में 71 हजार 288 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले प्राकृतिक जंगल के माला, महोफ, बराही, हरीपुर और दियोरिया रेंजों में बाघ तथा दूसरे वन्य जीव पाए जाते हैं। वन विभाग की चौकसी के बावजूद अक्सर शिकारी जंगल में घुस जाते हैं। कई बार शिकारियों को पकड़ा भी जा चुका है। मानसून सीजन में अक्सर शिकारियों की सक्रियता बढ़ जाती है। ऐसे में इन दिनों जंगल में पैट्रोलिंग तो बढ़ा दी गई, लेकिन आधुनिक उपकरणों की कमी खल रही है। प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व एरिया में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बनाई गई कार्ययोजना को मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन अभी बजट की धनराशि नहीं आई। हालांकि वन विभाग अपने मौजूदा संसाधनों से वन्य जीवों तथा जंगल की सुरक्षा के प्रति सतर्क है। मानसून पैट्रोलिंग लगातार जारी है।

 

 

As posted in Jagran.com

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