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राजस्थान में है पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग, जहां आते हैं रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षी

राजस्थान में है पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग, जहां आते हैं रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षी

Apr 12, 2014

अगर आप खूबसूरत रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों को देखना और उनकी आवाज को सुनना चाहते हैं तो पक्षी विहार सबसे बेहतर जगह है। मनमोहक रंगबिरंगे पक्षियों के कलरव से गूंजता भारतपुर पक्षी विहार पर्यटकों को खूब लुभाता है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान या केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। इसको पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था। यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है। यह भारत का सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य है जो 1964 में अभयारण्य और 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। यह उद्यान भरतपुर का सर्वाधिक प्रसिद्ध पर्यटन आकर्षण है। केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण लगभग 250 वर्ष पहले महाराजा सूरजमल ने करवाया था। यह राष्ट्रीय उद्यान 29 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

1985 में यूनेस्को ने इस उद्यान विश्व विरासत स्थान की मान्यता दी। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस लोकप्रिय राष्ट्रीय उद्यान की सैर करने के लिए आते हैं। वर्तमान में इस पार्क में कछुओं की कई किस्में, मछलियों की 50 किस्में और उभयचरों की पांच किस्में पाई जाती हैं। इसके अलावा यह उद्यान पक्षियों की लगभग 375 किस्मों का प्राकृतिक आवास है। इस उद्यान में न केवल देश से बल्कि यूरोप, अफगानिस्तान, चीन, मंगोलिया, रूस और तिब्बत आदि से भी पक्षी आते हैं। 5000 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर दुर्लभ प्रवासी पक्षी साइबेरियन क्रेन सर्दियों में यहां पहुंचते हैं जो पर्यटकों का मुख्य आकर्षण होते हैं। मानसून के मौसम के दौरान देश के प्रत्येक भागों से पक्षियों के झुंड यहां आते हैं। पानी में पाए जाने कुछ पक्षी जैसे सिर पर पट्टी और ग्रे रंग के पैरों वाली बतख, पिनटेल बतख, सामान्य छोटी बतख, रक्तिम बतख, जंगली बतख, वेगंस, शोवेलेर्स, सामान्य बतख, लाल कलगी वाली बतख आदि यहां पाए जाते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान सुंदर पक्षियों की 375 से अधिक प्रजातियों का बसेरा है। पक्षियों के अलावा पर्यटक जानवर जैसे काला हिरन, पायथन, सांबर, धब्बेदार हिरण और नीलगाय देख सकते हैं।

As posted in Jagran.com

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