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आबादी की ओर निकल पड़े जंगल के चार बाघ

आबादी की ओर निकल पड़े जंगल के चार बाघ

Feb 5, 2014

लखनऊ। मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर में एक बाघिन ने पूरे इलाके को लहूलुहान कर रखा है। पीलीभीत में बाघ देखा गया है। बाघ-बाघिन के हमलों में अब नौ लोग जान गंवा चुके हैं। यह वारदातें दिल दहलाने के लिए काफी हैं लेकिन असल में तराई में बाघ का खौफ इससे कहीं ज्यादा है। यहां एक-दो नहीं बल्कि चार बाघ जंगल छोड़कर इंसानी आबादी के इर्द-गिर्द मंडरा रहे हैं। अचानक बाघों के जंगल छोड़कर बाहर निकलने के बारे में जानकारों के दावे पर यकीन करें तो भूख की तड़प बाघों को बाहर खींच रही है। ठंड में शिकार का पीछा करते-करते यह रास्ता भटक रहे हैं। बरेली की सीमा में और फिर शहर के करीब पहुंचे बाघ के बारे में तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है कि वह बाघिन है और उसके साथ दो शावक भी हैं। करीब दो महीने पहले यह बाघिन पीलीभीत के जंगल से निकलकर अमरिया क्षेत्र में भटक रही थी। वहां से धीरे-धीरे बरेली की ओर रुख किया। उसका अगला ठिकाना कहां होगा, कहना मुश्किल है। कई पैरों के निशानों पर यकीन करें तो सिर्फ यही बाघिन नहीं, चार और बाघ इंसानों के लिए खतरा बने हुए हैं। पिछले कई दिनों से जहानाबाद क्षेत्र, बीसलपुर की दियोरिया रेंज और पूरनपुर के जटपुरा इलाके में बाघ आबादी के आसपास घूम रहे हैं। जानवरों को अपना निवाला बना रहे हैं। कई बाघों का रुख बरेली और शाहजहांपुर सीमा की ओर भी देखा गया है।

बस्ती में खींच ला रही भूख

आखिर एकाएक बाघ आबादी की ओर क्यों भाग रहे? इस बाबत व‌र्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के तराई आर्कलैंड प्रोजेक्ट हेड और टाइगर एक्सपर्ट हरीश गुलेरिया इसके कई कारण गिनाते हैं। उनका कहना है-जंगल में लगातार जानवरों की कमी से बाघों के सामने भोजन का संकट पैदा हो रहा है। सर्दियों में यह दिक्कत और भी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि जानवर भी सुरक्षित ठिकानों पर दुबके हुए हैं। भूख से बिलखते बाघ भोजन की तलाश में आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ, यह भी संभव है कि कुछ बाघ कोहरे में रास्ता भटककर शहर और गांव तक पहुंच गए हों। गुलेरिया के मुताबिक, तराई में उनके जंगल से बाहर आने का बड़ा कारण गन्ने की तैयार फसल भी है। अक्सर जंगली सुअर गन्ने की महक से खेतों तक पहुंच जाते हैं। इससे बाघों को शिकार की मौजूदगी आसान हो जाती है। इन दिनों बिजनौर में डेरा डाले गुलेरिया बताते हैं, यहां नरभक्षी हुए बाघ के पीछे एक बड़ा कारण शिकार की कमी है।

वर्चस्व की जंग भी वजह

पीलीभीत के महोफ जंगल से बाघिन के दो शावकों के साथ बाहर निकलने के पीछे अलग वजह सामने आई है। जानकारों की मानें तो जंगल में वर्चस्व की जंग में अपनी और बच्चों की सुरक्षा के खातिर यह बाघिन भाग निकली। वह सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ही भटकती हुई बरेली पहुंची होगी।

तीन साल में 12 शिकार

रुहेलखंड में तराई के जंगल हमेशा ही बाघों के लिए मुफीद रहे हैं। यही वजह है कि अक्सर यहां बाघ आबादी को भी निशाना बनाते रहे हैं। पिछले तीन साल के भीतर ही 12 इंसानों का शिकार बाघ अब तक कर चुके हैं। अधिकांश मामले पीलीभीत के हैं।

As posted in Jagran.com

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