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भालू को मारकर जंगल में ही दफना गए शिकारी, आधे अंग ग़ायब

भालू को मारकर जंगल में ही दफना गए शिकारी, आधे अंग ग़ायब

Dec 23, 2014

पीलीभीत : टाइगर रिजर्व अनुमोदित होने के बाद अति संरक्षित जोन के अंतर्गत आ चुके गढ़ा रेंज में अब भालू का शिकार किया जाना शुभ संकेत नहीं है। वन्य जीवों की बहुल्यता के कारण पीलीभीत के जंगल इन दिनों देश भर में चर्चा में हैं। संभवत: इसी कारण यहां मुख्य सचिव का दौरा दो दिन बाद है और ऐसा घटनाक्रम सामने आ चुका है। भालू की हत्या से पूर्व यहां सपा विधायक हेमराज वर्मा पूर्व में ही बाघों की संख्या पर सवाल उठा कर शासन तक बात पहुंचा चुकें हैं। मुख्यमंत्री ने इसमें जांच के आदेश भी कर रखे हैं। ऐसे में बेशकीमती भालू की श्रेणी अब शिकारियों की नजर में है। इस बार बाघ की बजाए शिकारियों ने भालू को टारगेट किया है। वन्य जीव श्रेणी के अंतर्गत भालू ग्रेड वन का सदस्य है। इसकी खाल से लेकर इसके अंगों तक को काफी कीमती और विलुप्त प्रजाति का माना जाता है। ऐसे में भालू की मौत कब हुई है या इसकी हत्या कब हुई है? इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है। भालू की खाल काफी कीमती मानी जाती है और इसके अन्य अंगों से इंसानी पित्त की दवा भी बनाई जाती है। वाणिज्य और औषधि बनाए जाने को लेकर भालू हमेशा ही शिकारियों के निशाने पर रहते हैं। टाइगर रिजर्व के अंतर्गत भालू का शिकार इस लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है कि जंगल में हमेशा ही वनकर्मियों की गश्त रहती है और कई दिनों बाद तक भी इस बारे में वन्य कर्मियों को जानकारी नहीं मिल सकी। जंगल में शिकार करके आराम से भालू को दबा दिया गया और किसी को इसकी भनक तक नहीं हो सकी।

कुछ अनसुलझे सवाल?

– अगर यह काम शिकारियों का है तो वे भालू का शिकार करके खाल उतार कर क्यों नहीं ले गए?

– भालू के शव को जंगल में क्यों दबाया गया?

– टाइगर रिजर्व में गश्त और वहां तैनात वन कर्मियों की ड्यूटी व सुरक्षा बंदोबस्त को घटना के बाद भी क्यों पता नहीं चला?

-कहीं यह वजह तो नहीं भालू की खाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिकती है?

– इतना ही नहीं इंसानी पित्त की थैली की दवा बनाने में भी भालू के कई अंगों का किया जाता है प्रयोग।

 

 

As Posted in Jagan.com

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