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अब तैयार होगी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की वार्षिक कार्ययोजना

अब तैयार होगी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की वार्षिक कार्ययोजना

Jun 16, 2014

पीलीभीत : यहां के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिए जाने के बाद अब वन विभाग वार्षिक कार्ययोजना तैयार करके राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भेजेगा। विभिन्न कार्यो के लिए अब वहीं से मंजूरी तथा बजट जारी होगी। इस बीच एनटीसीए की टीम जंगल का अध्ययन करके दिल्ली वापस लौट गई। टीम के सदस्य डीएफओ के साथ केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से वार्ता करने उनके संसदीय क्षेत्र कार्यालय पहुंचे लेकिन वहां भारी भीड़ की वजह से वार्ता नहीं हो सकी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनाने के लिए सभी औपचारिकताएं पहले ही पूरी की जा चुकी थीं। सिर्फ सरकार की ओर से घोषणा का इंतजार किया जा रहा था। गत दिवस राज्य सरकार ने विधिवत इसकी घोषणा भी कर दी। लखनऊ में इसकी घोषणा हुई और इधर, दिल्ली से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के सदस्य सचिव राज गोपालाचारी, एआइजी संजय कुमार ने यहां पहुंचकर प्रशासन तथा वन विभाग के अफसरों से मुलाकात कर जानकारी जुटाई। इसके बाद एनटीसीए की टीम ने महोफ एवं माला रेंज के जंगलों का रात में भ्रमण करके वहां की स्थिति का अध्ययन किया। इस दौरान दोनों रेंजों में बाघ समेत दूसरी प्रजातियों के वन्य जीवों के बारे में जानकारी जुटाई।

दो दिवसीय दौरे पर आईं जिले की सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के साथ एनटीसीए टीम के सदस्यों की वार्ता का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था। शनिवार को पूर्वाह्न जब श्रीमती गांधी टनकपुर रोड स्थित अपने संसदीय क्षेत्र कार्यालय पहुंचीं तो प्रभागीय वनाधिकारी राजीव मिश्रा के साथ एनटीसीए की टीम भी साथ गई। हालांकि कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ की वजह से टीम के सदस्यों की श्रीमती गांधी से वार्ता नहीं हो सकी। डीएफओ ने बताया कि टाइगर रिजर्व घोषित हो जाने के बाद अब एपीओ (एनुअल प्लान आफ आपरेशन) बनेगा। इसे एनटीसीए को भेजा जाएगा। वहीं से मंजूरी तथा बजट का आवंटन होगा।

रंग लाया डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का प्रयास

पीलीभीत : यहां के जंगलों में बाघों के संरक्षण के लिए वर्ष 2003 से कार्य कर रही संस्था विश्व प्रकृति निधि का पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस संस्था के कार्यो की वजह से ही पीलीभीत के जंगलों में बाघों के बारे में देश -दुनिया में पीलीभीत का नाम पहुंचा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से इस समय भी लेजर कैमरों के माध्यम से बाघों की गणना का कार्य चल रहा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रोजेक्ट अफसर नरेश कुमार के अनुसार दो रेंज में पहले से ही जीपीएस गश्त की व्यवस्था कराई जा चुकी है। जल्द ही शेष तीनों रेंजों में भी जीपीएस से गश्त की सुविधा वन विभाग को मुहैया कराई जाएगी।

 

As posted in Jagran.com

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