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सिक्स्थ सेंस नहीं, इस कारण होता है जानवरों को भूंकप का अहसास

सिक्स्थ सेंस नहीं, इस कारण होता है जानवरों को भूंकप का अहसास

Apr 27, 2015

सुनने में यह भले ही अजीब लगे लेकिन यह सच है कि जानवरों को प्राकृतिक आपदाओं के आने का पूर्वाभास हो जाता है। वैज्ञानिकों के एक अन्तरराष्ट्रीय दल द्वारा पालतू तथा जंगली जानवरों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि उन्हें अक्सर खतरे का अहसास हो जाता है।

जानवरों को प्राकृतिक आपदाओं के आने का पूर्वाभास होता है
इस तरह से किया गया अध्ययन

इसके लिए दुनिया भर से चुने गए शीर्ष वैज्ञानिकों की टीम ने जानवरों पर शोध शुरू किया। उन्होंने पेरू के जंगलों में कुछ जानवरों को अपने अध्ययन के लिए चुना। इसके बाद उन जानवरों की गतिविधियों को ट्रेक करने के लिए कैमरे तथा अन्य रिकॉर्डिग यंत्र लगाए गए। इन कैमरों से जानवरों की गतिविधियों पर ध्यान रखा जाता था। इस अध्ययन में सामने आया कि वहां आए एक भूकंप (जिसकी रिएक्टर स्केल पर तीव्रता 7 थी) से कुछ दिन पहले ही सभी जानवर उस स्थान स कहीं दूर चले गए थे। यहीं नहीं काफी दिन पहले से ही जानवरों के बर्ताव में असामान्य अंतर आ गया था।

इस कारण से बदल गया था जानवरों का बर्ताव

अध्ययन करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि भूकंप के पहले वातावरण में काफी अधिक मात्रा में पॉजिटीव आयन्स पाए गए थे। इसका कारण भूकंप के पहले जमीन में चट्टानों का खिसकना और आपस में टक्कर होना था। रगड़ और खिसकन के कारण पैदा हुए ये पॉजिटीव आयन जमीन के ऊपर वातावरण में इकट्ठा हो जाते हैं जहां पर ये स्थानीय निवासियों और जानवरों पर असर डालने लगते हैं। संभवत इससे बचने के लिए ही जानवर उस जगह से कही दूर किसी सुरक्षित जगह पर चले जाते हैं

दुनिया भर में है ऎसी कहानियां

दुनियाभर में भी कुछ इसी तरह की ऎतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं जिनके अनुसार भूकंप आने के पहले ही उस जगह के जानवर अपनी जगह छोड़ कर चले गए। इसका कारण सिक्स्थ सेंस नहीं होकर वैज्ञानिक तथ्य हैं। दुनिया भर में कई जगहों पर चली इस स्टडी में फैक्टस एक से ही पाए गए।

इसलिए आदमी नहीं पहचान पाता भूकंप के पूर्वाभास को

आज के समय में आदमी का प्रकृति से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। हमारे आस पास कंक्रीट का जंगल है जिसमें इस तरह के सभी संकेत दब जाते हैं और हम प्रकृति के संकेतों को नहीं समझ पाते। परन्तु जानवर प्रकृति के सीधे संपर्क में रहते हैं, वे प्रकृति में होने वाले अतिसूक्ष्म बदलाव को भी पहचान लेते हैं जिसके चलते किसी भी प्राकृ तिक अनहोनी को वो समय से पहले ही पहचान लेते हैं और अपने-अपने तरीके से चेतावनी देने लगते हैं।

 

 

As posted in Patrika.com

 

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