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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व से मांगे गए चार लेजर कैमरे

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व से मांगे गए चार लेजर कैमरे

Jul 20, 2015

पीलीभीत : सामाजिक वानिकी प्रभाग ने अमरिया क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ परिवार पर नजर रखने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व से चार लेजर कैमरों की मांग की हैं। कैमरे मिल जाने से बाघ की निगरानी बेहतर ढंग से हो सकेगी। वर्तमान समय में विश्व प्रकृति निधि के सात कैमरे बाघ परिवार की निगहबानी कर रहे हैं। तराई का इलाका बाघों के लिए मुफीद माना जाता है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ ही सामाजिक वानिकी प्रभाग में बाघ पाए जाते हैं। टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा बेहतर ढंग से हो पा रही है, जबकि सामाजिक वानिकी के बाघों का संरक्षण संसाधन की अनुउपलब्धता की वजह से संभव नहीं हो पा रहा है। फिर भी सामाजिक वानिकी के अफसर अमरिया क्षेत्र में कई सालों से घूम रहे बाघ परिवार की सुरक्षा जैसे तैसे कर रहा है। सुरक्षा में विश्व प्रकृति निधि का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। ये बाघ परिवार देवहा नदी की तलहटी को अपना प्राकृतिक आवास बना लिया है, जहां पर अक्सर बाघ घूमते हुए आसानी से दिख जाएंगे। स्वत: ही ये बाघ उत्तराखंड के सुरई जंगल में प्रवेश कर जाते हैं। फिर वापस आ जाते हैं। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाघ की मॉनीटरिंग करने के लिए चार कैमरे की डिमांड की है। ये कैमरे अमरिया क्षेत्र में विचरण करने वाले बाघों की निगरानी करेंगे। प्रभागीय निदेशक का कहना है कि टाइगर रिजर्व से लेजर कैमरा मिलने के बाद विश्व प्रकृति निधि की सहायता से अमरिया इलाके में लगवाए जाएंगे। फिलहाल सात कैमरों से बाघों की निगरानी की जा रही है। नियमित वन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। टाइगर मॉनीटरिंग का फीडबैक लिया जाता है।

-File Photo

उन्नाव की कटरी में घूम रही बाघिन

अमरिया क्षेत्र में विचरण करने वाली बाघिन कई माह पहले अपने बच्चों को छोड़कर उन्नाव पहुंच चुकी है, जो वहां की कटरी में विचरण कर रही है। उसके बच्चे यहां पर घूम रहे हैं। इस बाघिन के साथ दो से अधिक बच्चे थे, जो आज बड़े हो गए हैं।

 

 

As posted in Jagran.com

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