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बाघों की गणना के लिए ली जाएगी कैमरों की मदद

बाघों की गणना के लिए ली जाएगी कैमरों की मदद

Dec 20, 2013

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघों की गणना में कैमरों की भी मदद ली जाएगी। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) पूरे वन प्रभाग में कैमरे लगाएगी। इसके लिए एक टीम जंगल में उन स्थानों का सर्वेक्षण कर रही है।गौरतलब है कि पीलीभीत देश का इकलौता आरक्षित वन क्षेत्र है, जहां 40 से ज्यादा बाघ पाए गए हैं। पिछली गणना में यहां 42 बाघ और 6 तेंदुआ पाए गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने पीलीभीत के वन क्षेत्र को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान की थी।
हाल ही में राज्य सरकार ने भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। पीलीभीत के जंगल में केवल हाथी और गैंडों को छोड़कर सभी प्रजाति के वन्यजीव मिलते हैं। सूत्र बताते हैं कि पीलीभीत के जंगलों में हाल के दिनों में दो बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक की हत्या शिकारियों ने की थी, जबकि दूसरे की मौत बीमारी के चलते हुई थी, इसलिए प्रदेश सरकार ने जंगल में बाघों की गणना की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के जीव वैज्ञानिक आशीष बिष्ट के नेतृत्व में सात सदस्यीय दल कैमरे लगाने के लिए सर्वेक्षण कर रहा है।सूत्र बताते हैं कि पीलीभीत में जनवरी में बाघों की गणना की तैयारी के लिए उन स्थानों पर, विशेषकर जहां कोर एरिया में बाघों की साइटिंग हो चुकी है, वहां कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही उन स्थानों पर जो कॉरीडोर के इलाके हैं, वहां भी कैमरे लगाए जाने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है।डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि कैमरे लगाए जाने के लिए स्थानों का चयन किया जा रहा है। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम सर्वेक्षण कर रही है। रिपोर्ट आने पर ही हेडआफिस से कैमरों की मांग की जाएगी।

As Posted in Pradesh.com

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