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भारत में बाघों के आवास क्षेत्र में आई 41 फीसदी की कमी

भारत में बाघों के आवास क्षेत्र में आई 41 फीसदी की कमी

Sep 24, 2015

दिल्ली। देश में बाघों के लिए भजदगी बिताने के बेहतर स्थानों में 41 प्रतिशत की कमी आ गई है। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन नेटवर्क (आईयूसीएन) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों में बाघ हैं उनमें सबसे अधिक भारत में बाघों के विचरण का क्षेत्र घटा है।

दुनिया में कुछ ही देश हैं जहां बाघों को खुले रूप से भजदगी बिताने की आजादी है और उन देशों में मुख्य भूटान, चीन, नेपाल, थाईलैंड और रूस हैं। रिपोर्ट मेंं बताया गया है कि बाघों की तादाद घटने का एक प्रमुख कारण ये है कि वहां बाघों के स्वतंत्र विचरण का क्षेत्र घटता गया है।

बाघ संरक्षण क्षेत्र में औसतन 55 प्रतिशत क्षेत्र ऐसा है जहां बाघ नहीं है, या बाघों की तादाद कम है और उसमें मानव आबादी अनुमानित 41 प्रतिशत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1997 के मुकाबले वर्तमान में देश में बाघों के लिए 11,84,911 वर्ग किलोमीटर से भी कम भूमि रह गई है। जैव वैज्ञानिक इसके पीछे अवैध शिकार और बाघ संरक्षित क्षेत्र में आई कमी को कारण बताते हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर बाघ संरक्षण के उपायों को और प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया तो बाघों की अगली तीन पीढिय़ों (20-30 वर्ष) तक इसी तरह कमी आती जाएगी। सर्वे में ये भी बताया गया है कि वर्ष 2006-2010 के बाघ आवासीय क्षेत्र के मुकाबले अब 12.6 प्रतिशत की कमी आई है।

हालांकि रिपोर्ट में राज्यवार आंकड़े नहीं दिए गए हैं, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जहां अधिकतम बाघ थे लेकिन वहां पिछले दो साल में जंगलों में सर्वाधिक कमी आई है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार देश के इस राज्य में सर्वाधिक क्षेत्र में जंगल थे लेकिन वहां घने जंगल, कम घने जंगल और हरियाली क्षेत्र में निरंतर गिरावट आती जा रही है।

मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में कुल 6,90,899 किलोमीटर क्षेत्र में जंगल है तथा इसका 11.24 प्रतिशत अर्थात 77,700 किलोमीटर क्षेत्र के जंगल मध्यप्रदेश में हैं। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के सीधी, मांडला, सतना, उमरिया, जबलपुर, झाबुआ, पूर्वी निमार, देवास, भछदवाड़ा, छतरपुर तथा बालाघाट जिलों में खासतौर पर घने जंगलों में कमी आई है और इन्हीं इलाकों में बाघों का बसेरा है। इसके विपरीत नेपाल में वहां की सरकार ने हाल ही पारसा वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार को मंजूरी दी है।

इससे वहां बांघों को विचरण के लिए 2500 वर्ग किलोमीटर और क्षेत्र मिल जाएगा जिससे वन्य जीव विशेषज्ञों को आशा है कि वहां 40 से अधिक बाघ आराम से रह सकेंगे। यह जो नया क्षेत्र होगा इसे बारा फोरेस्ट के नाम से जाना जाता है जिसमें पहले थोड़ी आबादी भी थी। दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व में से होकर केन-बेतवा नदी परियोजना का काम शुरू होने की संभावना है जिससे यहां बाघों के रहवास का क्षेत्र कम हो जाएगा।

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