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बंदीघर से अब तक महरूम है पीलीभीत टाइगर रिजर्व

बंदीघर से अब तक महरूम है पीलीभीत टाइगर रिजर्व

Sep 12, 2015

पीलीभीत : पुलिस अभिरक्षा से आरोपियों के भागने के मामले आए दिन प्रकाश में आते रहते हैं। बावजूद इसके पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन आरोपियों को लेकर बेपरवाह बना हुआ है। यहां पकड़े गए तस्करों को जेल में नहीं बल्कि चौपहिया वाहन में रखा जाता है। उसकी सुरक्षा महज एक कर्मचारी के जिम्मे होती है। इसकी वजह जेल का न होना है। अभी तक बंदीघर बनाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए।

नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल लगा हुआ है, जो हर समय संवेदनशील रहता है। जंगल सीमा की दिन-रात एसएसबी सुरक्षा कर रही है, जिसमें वन कर्मचारी मदद करते हैं। इसके बावजूद वन्यजीव हत्याओं के मामले में प्रकाश में आते हैं। इन मामले में आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाता है। हिरासत में लेने के बाद जिला मुख्यालय लाया जाता है, जहां पर आरोपियों को रखने के लिए बंदीघर भी नहीं है। यहीं कुछ हालत रेंज स्तर पर है। बंदीघर न होने की दशा में आरोपियों को चौपहिया वाहनों में बैठाए रखा जाता है, जब तक आरोपी को जेल न भेज दिए जाए। इस प्रक्रिया में कई घंटे लग जाते हैं। आरोपियों की सुरक्षा में वन कर्मचारी तैनात रहते हैं। टाइगर रिजर्व में एक साल बाद भी बंदीघर नहीं बन सका है। बंदीघर बनाने की दिशा में किसी प्रकार के प्रयास नहीं किए गए। इस वजह से फील्ड के वन कर्मचारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर कोई बंदी हिरासत से फरार हो जाए, तो वन कर्मचारियों पर कार्रवाई होना तय है।

 

 

As posted in Jagran.com

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