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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में नए पर्यटन स्थल की कवायद

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में नए पर्यटन स्थल की कवायद

Sep 22, 2015

पीलीभीत : टाइगर रिजर्व के जंगल में नए पर्यटन स्थल बनाने की कवायद तेज हो गई है। नए पर्यटन स्थल के लिए जगह तलाशने का काम शुरू कर दिया गया है, जिस पर अतिशीघ्र ही निर्णय ले लिया जाएगा। कवायद से पर्यटकों को नए स्पॉट पर घूमने-फिरने का मौका मिलेगा, जिससे पर्यटन कारोबार में बढ़ोत्तरी होगी।

तराई क्षेत्र के पीलीभीत टाइगर रिजर्व की नौ जून 2015 को घोषणा की गई थी, इससे पहले पीलीभीत वन्यजीव विहार था। टाइगर रिजर्व बनने के बाद जनपद की पहचान दुनिया भर में हो गई। पहला पर्यटन सीजन 15 जून को समाप्त हो चुका है। टाइगर रिजर्व के जंगल में सीमित संख्या में पर्यटन स्थल होने की वजह से टूरिस्टों को सैर सपाटे में आनंद नहीं आता है। वर्तमान में ईको टूरिज्म स्पॉट चूकाबीच, सप्त सरोवर, वाइफरकेशन, सुप्रसिद्ध सिद्धबाबा मंदिर आदि स्पॉट हैं, जहां पर एक दिन में आसानी से सैर की जा सकती है। कोर एरिया में चूका बीच होने की वजह से जंगल में रहने वाले वन्यजीवों के वासस्थल पर प्रतिकूल असर पड़ता है। शोरगुल की वजह से वन्यजीव शांतिपूर्ण वातावरण में चले जाते हैं। इस वजह से टूरिस्टों को जानवर नहीं दिख पाते हैं।

अब टाइगर रिजर्व की सैर पर आने वाले टूरिस्टों को कई नए स्पॉटों के दर्शन करने को मिलेंगे। इस संबंध में वन अफसरों ने प्रयास तेज कर दिए हैं। नया पर्यटन स्थल बराही रेंज के जंगल में विकसित किया जा रहा है, जिसकी जमीन जल्द ही फाइनल हो जाएगी। नए स्पॉट विकसित करने के लिए जमीन तलाशने का काम किया जा रहा है, जो ज्यादा जंगल के अंदर न हो। टूरिस्टों के आने के बाद वन्यजीव सुरक्षित रह सके। इस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के मुताबिक, जंगल में नया पर्यटन स्थल विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जगह तलाशने का काम चल रहा है, जो अतिशीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

गढ़ा को किया जा सकता विकसित

माला रेंज के गढ़ा जंगल में कई साल पहले आपरेशन ग्रीन के तहत पार्क विकसित किया गया था जो आसाम हाईवे पर स्थित है। हाईवे के समीप ही वन अतिथि गृह है, जहां टूरिस्ट जंगल घूमने के बाद रात्रि विश्राम कर सकते हैं। इस स्थान को विकसित करने में टाइगर रिजर्व प्रशासन दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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