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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में पर्यटन की संभावनाएं अपार लेकिन लापरवाही बरकरार

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में पर्यटन की संभावनाएं अपार लेकिन लापरवाही बरकरार

Sep 28, 2015

पीलीभीत : तराई के इस जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनके प्रति देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इससे रोजगार के साधन भी बढ़ सकते हैं लेकिन उन स्थलों को विकसित करने के साथ ही वहां तक पहुंचने वाले रास्तों को अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया। दर्शनीय स्थलों का पर्यटन की ²ष्टि से समुचित प्रचार प्रसार भी नहीं हो सका है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व बने साल भर से अधिक समय बीत गया। टाइगर रिजर्व बनने के बाद पीलीभीत विश्व पर्यटन के नक्शे पर तो आ गया लेकिन पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं हो सके हैं। इस मामले में घोर लापरवाही बरती जा रही है। यूं तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पूरा क्षेत्र पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन जंगल के अंदर ईको टूरिज्म स्पाट चूका, सप्त सरोवर, बाइफरकेशन आदि तक पहुंचने वाले रास्ते बदहाल हैं। टाइगर रिजर्व बनने के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए टूरिस्ट गाइड का चयन कई महीने पहले किया जा चुका है लेकिन उन्हें कोई काम अब तक नहीं मिला। अलबत्ता डीएफओ कैलाश प्रकाश का कहना है कि धीरे-धीरे सभी इंतजाम हो रहे हैं। आगामी नवंबर से जब चूका स्पाट पर्यटक सीजन में खुलेगा तो कई नई व्यवस्थाएं कराई जाएंगी। इसका प्रचार-प्रसार भी होगा।

सूबे की राजधानी लखनऊ की शान कही जाने वाली गोमती नदी का उद्गम इसी क्षेत्र में हुआ है। माधोटांडा में गोमती का उद्गम स्थल है लेकिन इसकी भी उपेक्षा हो रही है। मुख्य कस्बे से गोमती उदगम स्थल तक जाने वाला मार्ग दुरुस्त नहीं है। इसी प्रकार पूरनपुर क्षेत्र में इकहोत्तर नाथ का प्राचीन मंदिर है लेकिन यहां तक रास्ता खेतों के बीच पगडंडी से होकर जाता है। शहर में भी कई दर्शनीय स्थल हैं। गौरीशंकर मंदिर पुरातत्व विभाग में दर्ज है। इस मंदिर का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना पीलीभीत। दिल्ली की शाही जामा मस्जिद की तर्ज पर यहां रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां की बनवाई मस्जिद, शाहजी मियां की दरगाह, आस्तान ए हशमतिया ऐसे स्थल हैं, जहां इसी प्रदेश से नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग आते रहते हैं। पर्यटन महत्व के अनेक स्थल होते हुए भी उनका विकास नहीं होने और सही ढंग से प्रचार-प्रसार के अभाव की वजह से ही पर्यटन को गति नहीं मिल पा रही है।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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