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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल में शिकार करने आए धरे गए तीन शिकारी

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल में शिकार करने आए धरे गए तीन शिकारी

Sep 13, 2015

पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में एक बार फिर शिकारियों ने दस्तक दी। ढका बीट के कक्ष संख्या आठ के पास शिकारी पाड़ा का शिकार करने के लिए पहुंच गए। जंगल के बीच जाल बिछाकर जानवर के फंसने का इंतजार किया। पर इससे पहले कि शिकारी सफल हो पाते। वनविभाग की गश्ती टीम की नजर बिछाए गए जाल पर पड़ गई। टीम के पहुंचते ही शिकारियों ने भागने का प्रयास किया, पर कुछ ही दूरी से तीन को पकड़ लिया गया। जानकारी मिलने पर डीएफओ ने पकड़े गए शिकारियों से बातचीत की। जिसके बाद सभी को केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। शिकारियों की धरपकड़ के बाद विभाग की ओर से जंगल में चैकसी बढ़ा दी गई है।

21 shikari

घटना शुक्रवार सुबह करीब दस बजे की है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की ढका बीट में डिप्टी रेंजर चंद्रभाल सिंह, उपनिरीक्षक रामप्रकाश, वाचर लालाराम, तेजराम, ओमप्रकाश और सियाराम गश्त पर निकले हुए थे। कक्ष संख्या आठ के पास पहुंचते ही टीम को जंगल के बीच एक खाबड़ जाल बिछा दिखाई दिया। जाल देखकर टीम को शिकारियों के आसपास होने का आभास हो गया। जिसके बाद इलाके में शिकारियों की तलाश शुरू कर दी गई। इस बीच जंगल में छिपे शिकारी टीम को देखकर हड़बड़ा गए और भागने लगे। इस पर टीम के सदस्यों ने पीछा कर तीन लोगों को मौके से धर दबोचा। इनके पास से जाल, भाला, कुल्हाड़ी, बांका आदि बरामद हुआ। तीनों को पकड़कर पास की वनचैकी पर ले जाया गया। जहां पूछताछ में तीनों ने अपना नाम सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के किसनपुर हरिपुर निवासी देवसरन पुत्र गेंदनलाल, पप्पू पुत्र नौबतराम, सूरजपाल उर्फ अन्ने पुत्र श्याम बिहारी बताया। यह भी बताया कि तीनों पाड़ा का शिकार करने के लिए आए थे। जाल में फंसने के बाद उसको भाला, कुल्हाड़ी से मार देते। शिकार बेचने के लिए नहीं, मांस खाने के लिए कर रहे थे। तत्काल सूचना टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश को दी गई। देर शाम कार्यालय बुलाकर डीएफओ ने शिकारियों से पूछताछ की। जिसके बाद सभी को मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।

निकाला जाएगा पुराना रिकार्ड

टाइगर रिजर्व में शिकार करते रंगेहाथ पकड़े गए तीनों युवकों की हिस्ट्री खंगाली जाएगी। वन्यजीव का मांस खाने के लिए शिकार कर रहे थे या फिर तस्करी के लिए। इसका पता लगाया जाएगा। यही नहीं पहले कभी तो आरोपी पकड़े नहीं गए। इसकी जांच करने के लिए वनविभाग की टीम तीनों शिकारियों के क्रिमिनल हिस्ट्री का पता लगाएगी। जिसके लिए प्रयास तेज कर दिए गए है।

हिरन की प्रजाति होती है पाड़ा

वनविभाग की टीम के मुताबिक पाड़ा हिरन की एक प्रजाति होती है। जिसका मांस खाने के लिए आरोपी शिकार करने आए थे। पाड़ा बेहद शर्मिला किस्म का होता है। किसी तरह की चहल कदमी एवं लोगों को देखकर यह सिर झुका लेता है। जिसके बाद बिना सिर उठाए ही छिपते छिपाते खेत में भाग जाता है। पीलीभीत के जंगल में इसकी प्रजाति पाई जाती है।

गश्त के दौरान ढका वीट के कक्ष संख्या आठ से तीन लोग शिकार करते पकड़े गए है। इनके पास से शिकार से जुड़ी तमाम चीजें बरामद हुई है। जिस पर कार्रवाई की जा रही है। पूछताछ में इन्होेन हिरन की प्रजाति पाड़ा का शिकार करने की बात कबूल की है। सभी को मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है।

कैलाश प्रकाश, डीएफओ (पीलीभीत टाइगर रिजर्व)

 

 

 

As posted in Pilibhitlive.com

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