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‘निवाले’ की कमी ने बिगाड़ा संतुलन

‘निवाले’ की कमी ने बिगाड़ा संतुलन

Feb 26, 2014

पीलीभीत : बाघ जब जंगल से बाहर आकर हमले करता है तो हो हल्ला मच जाता है। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर गौर जरूरी है। दरअसल मानव अपनी जरूरतें पूरी करने को जंगली संसाधनों का प्रयोग कर रहा है। ऐसे में बाघ के निवाले के लिए घास और जरूरी संसाधन नष्ट हो रहे हैं। यही वजह है कि बाघ कंकरीट के जंगल में आकर हमलावर हो रहे हैं। अफसरों की माने तों जंगल में हरी घास की कमी होने से वन्य जीवों के भोजन का प्राकृतिक संतुलन गड़बड़ा रहा है। ढकिया बांसखेड़ा सहित कई जगह लोगों पर बाघ के हमले से हड़कंप मचा हुआ है। वन्यजीव प्रेमियों की मानें तो जंगल में मनुष्य के बढ़ते दबाव के चलते ही टाइगर बाहर निकल रहा है। अपने यहां के सैकड़ों लोग हर रोज जंगल पहुंचते हैं। किसी को जलौनी लकड़ी चाहिए तो कोई घास, फूंस, नरकुल आदि चाहिए। ऐसे में बाघ के आहार यानि वन्य जीव जंगल से बाहर आ रहे हैं और अपने आहार के लिए उनके पीछे बाघ भी जंगल से निकलकर मानव बस्ती के पास तक पहुंच रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो जंगल में घास की कमी हो गई है। इससे तृणभोजी जीव जंगल से बाहर खेतों में जाते हैं और बाघ उन्हें अपना आहार बनाने के लिए खेतों तक आ जाता है।

जंगल में घास की हुई कमी

पूरनपुर के एसडीओ सुधाकर मिश्रा का कहना है कि इस समय जंगल में हरी घास की कमी है। इसी कारण हिरन, सुअर आदि भूख मिटाने खेतों की तरफ आते हैं। उनके पीछे शिकार करने बाघ आ रहा है। लोगों को जंगल की तरफ जाना कम करना चाहिए।

संतुलन कायम रखना जरूरी

टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां का कहना है कि अपने यहां टाइगर की संख्या बढ़ी है। इसी कारण वह जंगल से बाहर आ रहे हैं। हिरन आदि के लिए घास की कमी होने एवं गन्ने को बाघ द्वारा जंगल सा ही अपना वास मान लेने से बाघों की मौजूदगी बाहर देखी जा रही है।

As posted in Jagran.com

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