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उत्तराखंड और नेपाल में मारे जा रहे पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन्य जीव

उत्तराखंड और नेपाल में मारे जा रहे पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन्य जीव

Nov 7, 2015

पीलीभीत: टाइगर रिजर्व की खुली सीमा वन्यजीवों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। यहां टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था सख्त हुई तो शिकारियों ने नेपाल सीमा में शुक्ला फंटा सेंचुरी व उत्तराखंड में बघा 54 क्षेत्र को अपना ठिकाना बना लिया है। इस जंगल से सीमा पार करने वाले हिरन, चीतल, खरगोश, जंगली मुर्गा जैसे वन्य जीवों के साथ परिंदों का भी खूब शिकार होता है। नेपाल से लगी सीमा की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर भी नाव के सहारे इधर की सीमा तक पहुंचने वाले शिकारी रेटाल नामक जहर देकर वन्यजीवों व देशी-विदेशी परिंदों को मार देते हैं। हालाकि टाइगर रिजर्व प्रशासन के पास अभी तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं है। टाइगर रिजर्व के बराही रेंज में लग्गा-भग्गा सीमा से नेपाल की शुक्ला फंटा सेंचुरी का इलाका जुड़ता है। यहां भारत की सीमा में तो एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के साथ टाइगर रिजर्व प्रशासन भी सतर्क रहता है, लेकिन जंगल का बड़ा क्षेत्र शारदा नदी से जुड़ा है। यहां नाव के सहारे शिकारी पहुंच कर वन्य जीवों व परिंदों का जहर देकर शिकार करते हैं। गभिया, नौजलिया व रमनगरा जैसे इलाकों तक ये शिकारी पहुंच जाते हैं। यहां पत्तों पर रेटाल नामक जहर रखकर पानी में तैरा देते हैं। इसमें फास्फोरस होने कारण यह चमकता है, जिससे साइबेरियन सहित तमाम प्रकार के पक्षी व जलजीव इसे खाते ही बेहोश हो जाते हैं। वहीं पर ताक में बैठे शिकारी नाव के जरिए अपने शिकार को पकड़ लेते हैं। शारदा सागर डाम में जाल डालकर पक्षियों का शिकार होता है। यह तो बात हुई इस पार की, जो वन्यजीव नेपाल की सीमा में पहुंच जाते हैं, उधर शिकारी आसानी से शिकार कर लेते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय सीमा होने की वजह से इधर का टाइगर रिजर्व प्रशासन भी उधर कुछ नहीं कर पाता। ठीक इसी प्रकार टाइगर रिजर्व के महोफ रेंज का बड़ा हिस्सा उत्तराखंड की सीमा से लगा हुआ है। दोनों ओर जंगल होने के कारण वन्य जीवों का दोनों ओर आवागमन रहता है। यहां जगह-जगह टाइगर रिजर्व प्रशासन की चौकियां होने कारण शिकारी इधर तो अपना काम नहीं कर पाते, लेकिन उत्तराखंड के बघा 54 क्षेत्र में खुलेआम वन्य जीवों का शिकार होता है।

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ब्रीडिंग का हवाला देकर कटीले तार लगाने से कतरा रहे

इस प्रकार टाइगर रिजर्व जंगल के वन्य जीवों का नेपाल और उत्तराखंड में शिकार हो रहा है। ऐसा नहीं कि सीमा पार हो रहे इस घिनौने खेल से टाइगर रिजर्व प्रशासन अवगत नहीं है, लेकिन वन्य जीवों के ब्रीडिंग का हवाला देकर कटीली बाड़ लगाने से कतरा जाते हैं।

टाइगर रिजर्व में बाघ के साथ ही अन्य वन जीवों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। यह सही है कि टाइगर रिजर्व की सीमा नेपाल और उत्तराखंड से जुड़ी है। दोनों ओर जंगल है, इसलिए वन्यजीवों का उन्मुक्त दोनों ओर विचरण भी होता रहता है। दोनों ओर वन्य जीव सुरक्षित रहें, इसके लिए उधर के भी संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क रहता है।

-कैलाश प्रकाश, डीएफओ पीलीभीत टाइगर रिजर्व

 

 

 

 

As posted in Jagran.com

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